Saturday, December 15, 2012

शब्द



शब्द 
ईश मिश्र 

शब्द बेचैन करते हैं
कुछ शब्द तो बहुत बेचैन करते हैं 
बेचैनी गवाह है ज़मीर की मौजूदगी की 
कराती है एहसास अंतरात्मा की अतल गहराइयों की 
बेचैनी अंतरात्मा का गुण है दोष नहीं 
वैसे ही जैसे शर्म है एक क्रांतिकारी एहसास 
   [26.06.05]

No comments:

Post a Comment