Sunday, December 3, 2017

मार्क्सवाद 96 (आरक्षण)

समाज में समानता होती तो आरक्षण का मुद्दा ही नहीं उठता। वैसे भी आरक्षण निजाकरण, व्यापारीकरण, संविदा यानि ठेकेदारीकरण.... से आरक्षण वैसे ही अप्रांसंगिक होता जा रहा है। लोग आरक्षण को, खासकर मंडल कमीसन को जातिवाद का कारण बताते हैं, जैसे कि 1989 के पहले हमारा समाज जाति और भेदभाव से मुक्त समाज था? आरक्षण क्रांतिकारी नहीं सुधारवादी कदम है जिसने कांपसों की संरचना बदल दिया। अब अगला कदम इंकिलाब। दुनिया के मजदूरों की एकता। अंतिम संघर्ष, वर्गसंघर्ष, धरती की युद्धों के प्रलय से मुक्ति का संघर्ष, सरहदों के आर-पार। सरहदें जरूर टूटेंगी, जब दुनिया के मजदूर एक होंगे, राष्ट्रवाद की मिथ्याचेतना की जगह, मुक्ति की वर्गचेतना होगी जिसमें कोई हिटलर हलाकू सेंध नहीं मार पाएगा।

1 comment:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (05-12-2017) को दरमाह दे दरबान को जितनी रकम होटल बड़ा; चर्चामंच 2808 पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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